आज की आधुनिक कंप्यूटर और इलेक्ट्रॉनिक दुनिया में SMPS का नाम अक्सर सुनने को मिलता है। लेकिन बहुत से लोगों को यह पता नहीं होता कि SMPS kya Hota Hai, यह कैसे काम करता है और इसके क्या फायदे हैं। इस ब्लॉग में हम सरल भाषा में SMPS की पूरी जानकारी देंगे – इसका फुल फॉर्म, काम करने का तरीका, इसके प्रकार और उपयोग। SMPS kya Hota Hai?

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SMPS kya Hota Hai? (what is SMPS)
SMPS का फुल फॉर्म है Switched Mode Power Supply। हिंदी में इसे स्विच्ड मोड पावर सप्लाई कहा जाता है। यह एक प्रकार की पावर सप्लाई यूनिट (Power Supply Unit) है, जो कंप्यूटर, टीवी, मोबाइल चार्जर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में बिजली को सही वोल्टेज और करंट में बदलकर पहुंचाती है।
साधारण भाषा में कहें तो, अगर आपके घर में 220V AC करंट आता है, तो SMPS उसे बदलकर आपके कंप्यूटर या डिवाइस को सुरक्षित DC पावर देता है।
History of SMPS (SMPS का इतिहास)
SMPS यानी Switched Mode Power Supply का इतिहास इलेक्ट्रॉनिक तकनीक के विकास से जुड़ा हुआ है। जब शुरुआती दौर में कंप्यूटर और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बनाए जा रहे थे, तब उनमें Linear Power Supply का उपयोग होता था। Linear सप्लाई स्थिर DC वोल्टेज तो देती थी, लेकिन यह भारी, बड़ी और ऊर्जा खपत करने वाली तकनीक थी। इसके कारण इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ज्यादा गर्म होते थे और बिजली की बर्बादी भी अधिक होती थी।
- शुरुआती विकास
1960 के दशक में SMPS तकनीक पर शोध शुरू हुआ। सबसे पहले इसे सैन्य और अंतरिक्ष परियोजनाओं में इस्तेमाल किया गया, क्योंकि वहाँ हल्के और कुशल (efficient) पावर सिस्टम की आवश्यकता थी। शुरुआती SMPS महंगे और जटिल थे, लेकिन उन्होंने यह साबित कर दिया कि हाई-फ़्रीक्वेंसी ट्रांसफॉर्मर और स्विचिंग तकनीक से बिजली को ज्यादा प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है।
- 1970 का दशक
1970 के दशक में माइक्रोप्रोसेसर और कंप्यूटर के आने के बाद, छोटी और पावर-एफिशिएंट सप्लाई की मांग तेजी से बढ़ी। इस समय से SMPS को वाणिज्यिक स्तर पर अपनाया जाने लगा। IBM और अन्य कंपनियों ने कंप्यूटर में SMPS का उपयोग शुरू किया, जिससे डिवाइस हल्के और ज्यादा भरोसेमंद बने।
आधुनिक युग
आज SMPS लगभग हर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का हिस्सा है—चाहे वह कंप्यूटर, मोबाइल चार्जर, LED टीवी, सर्वर या नेटवर्किंग डिवाइस क्यों न हो। यह न केवल बिजली की खपत कम करता है बल्कि लंबे समय तक स्थिर प्रदर्शन भी देता है।
सरल शब्दों में कहा जाए तो SMPS का इतिहास यह दर्शाता है कि कैसे तकनीक ने भारी और कम दक्षता वाली Linear Power Supply को बदलकर हल्की, तेज़ और ऊर्जा-संरक्षक प्रणाली प्रदान की, जो आज की आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक दुनिया की रीढ़ बन चुकी है।
SMPS की आवश्यकता क्यों होती है?
जब कोई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस काम करता है, तो उसे एक स्टेबल और निश्चित वोल्टेज की जरूरत होती है। सीधे AC पावर से डिवाइस चलाने पर वोल्टेज फ्लक्चुएशन और करंट की समस्या से वह खराब हो सकता है। इसीलिए SMPS का उपयोग किया जाता है।
- ज्यादा वोल्टेज को कम करता है।
- AC को DC में बदलता है।
- बिजली को फिल्टर करके स्थिर और साफ (clean power) आउटपुट देता है।
- डिवाइस को शॉर्ट-सर्किट या ओवरलोड से बचाता है।
SMPS Kaise Kam Karta Hai ?
SMPS का काम करने का तरीका थोड़ा तकनीकी है, लेकिन इसे आसान भाषा में समझते हैं:
SMPS यानी Switched Mode Power Supply एक ऐसी पावर सप्लाई तकनीक है जो कम बिजली की खपत करते हुए, उच्च दक्षता (efficiency) के साथ काम करती है। सामान्य तौर पर, बिजली हमें AC (Alternating Current) के रूप में मिलती है, लेकिन कंप्यूटर या अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को DC (Direct Current) की आवश्यकता होती है। यहाँ पर SMPS की भूमिका शुरू होती है। सबसे पहले, SMPS AC वोल्टेज को Rectifier और Filter की मदद से DC वोल्टेज में बदलता है। इसके बाद यह DC वोल्टेज को हाई-फ़्रीक्वेंसी पल्स (pulses) में कन्वर्ट करने के लिए Transistor या MOSFET का उपयोग करता है। यही हाई-फ़्रीक्वेंसी सिग्नल Transformer से होकर गुजरता है और अंत में Regulator और Filter सर्किट की मदद से स्थिर (stable) और सुरक्षित DC आउटपुट वोल्टेज तैयार करता है।
उदाहरण के लिए, यदि आपके कंप्यूटर SMPS को 230V AC सप्लाई दी जाए तो वह इस इनपुट को बदलकर +12V, +5V और +3.3V जैसे अलग-अलग DC वोल्टेज प्रदान करता है। +12V का उपयोग CPU फैन, ग्राफिक्स कार्ड और मोटर ड्राइविंग के लिए होता है, जबकि +5V का उपयोग USB डिवाइस और मदरबोर्ड के कई हिस्सों में किया जाता है। इसी तरह +3.3V RAM और अन्य छोटे सर्किट को सप्लाई देता है। यही कारण है कि SMPS कंप्यूटर और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का एक अनिवार्य हिस्सा है। इसकी खासियत यह है कि यह पुराने Linear Power Supply की तुलना में कम गर्मी उत्पन्न करता है और ज्यादा पावर एफिशिएंट होता है।
इस प्रकार, “SMPS कैसे काम करता है?” समझने पर यह साफ होता है कि यह तकनीक न केवल बिजली को सही रूप में बदलती है बल्कि डिवाइस को सुरक्षित और लंबे समय तक चलने में मदद करती है।
- AC से DC कन्वर्ज़न – सबसे पहले SMPS आपके घर से आने वाले AC करंट को DC करंट में बदलता है।
- स्विचिंग प्रोसेस – इसके बाद यह हाई-फ्रिक्वेंसी स्विचिंग तकनीक का उपयोग करता है, जिससे बिजली की वोल्टेज को तेज़ी से नियंत्रित किया जा सके।
- ट्रांसफॉर्मेशन – एक ट्रांसफॉर्मर के जरिए वोल्टेज को बढ़ाया या घटाया जाता है।
- रेक्टिफिकेशन और फिल्टरिंग – आउटपुट को फिल्टर करके साफ DC पावर दी जाती है।
- रेगुलेशन – यह सुनिश्चित करता है कि डिवाइस को हमेशा स्थिर और सुरक्षित वोल्टेज मिले।
SMPS Kitne Prakar Ke Hote Hain
SMPS कई प्रकार के होते हैं। आइए इसके मुख्य प्रकार समझते हैं:
- DC to DC Converter SMPS – यह एक DC वोल्टेज को दूसरे DC वोल्टेज में बदलता है।
- AC to DC Converter SMPS – सबसे सामान्य प्रकार, जो घर के AC करंट को DC पावर में बदलता है।
- Fly back Converter – छोटे पावर डिवाइस जैसे चार्जर और टीवी में उपयोग होता है।
- Forward Converter – बड़े पावर डिवाइस जैसे सर्वर और कंप्यूटर पावर सप्लाई में उपयोग होता है।
- Bridge Converter – हाई पावर सिस्टम्स में इस्तेमाल किया जाता है।

Advantages of SMPS in Hindi
SMPS का उपयोग करने से कई लाभ होते हैं, जैसे:
- ऊर्जा की बचत – यह पारंपरिक Linear Power Supply से ज्यादा पावर-इफिशिएंट होता है।
- छोटा आकार – इसका साइज छोटा और हल्का होता है।
- लंबी लाइफ – यह लंबे समय तक बिना ज्यादा खराब हुए काम करता है।
- कम हीट जनरेशन – यह कम गर्मी पैदा करता है, जिससे डिवाइस सुरक्षित रहता है।
- वोल्टेज रेगुलेशन – यह आउटपुट वोल्टेज को हमेशा स्थिर रखता है।
SMPS और Linear Power Supply में अंतर
बहुत से लोग पूछते हैं कि SMPS kya Hota Hai और यह साधारण पावर सप्लाई से कैसे अलग है।
| विशेषता | SMPS | Linear Power Supply |
| आकार | छोटा और हल्का | बड़ा और भारी |
| एफिशिएंसी | 70%-90% | 40%-60% |
| हीट जनरेशन | कम | ज्यादा |
| कीमत | थोड़ी | ज्यादा |
| उपयोग | आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स | पुराने डिवाइस |
Linear Power Supply
एक ऐसी पावर सप्लाई तकनीक है जो AC वोल्टेज को DC वोल्टेज में बदलने के लिए Transformer, Rectifier, Filter और Regulator का उपयोग करती है। इस प्रकार की सप्लाई की खासियत यह है कि यह आउटपुट वोल्टेज को बहुत ही साफ (clean) और स्थिर (stable) रूप में उपलब्ध कराती है। इसमें Transformer सबसे पहले AC वोल्टेज को कम या ज्यादा करता है। इसके बाद Rectifier इस AC वोल्टेज को DC में बदलता है, लेकिन इसमें हल्की-फुल्की रिपल (ripple) मौजूद रहती है। इस रिपल को हटाने के लिए Filter का उपयोग किया जाता है। अंत में Voltage Regulator एकदम स्थिर और नियंत्रित DC आउटपुट प्रदान करता है।
उदाहरण के लिए, यदि हमारे पास 230V AC इनपुट है और हमें 12V DC आउटपुट चाहिए, तो Linear Power Supply का Transformer 230V को घटाकर लगभग 15V AC कर देता है। इसके बाद Rectifier इस वोल्टेज को DC में बदलता है और Filter रिपल हटाकर इसे और स्मूथ बनाता है। अंत में Regulator इसे बिल्कुल 12V DC स्थिर आउटपुट में बदल देता है।
Linear Power Supply का उपयोग अक्सर ऑडियो उपकरणों, रेडियो, मेडिकल डिवाइस और उन जगहों पर किया जाता है जहाँ शुद्ध और शोर-रहित बिजली की आवश्यकता होती है। हालांकि इसकी कार्यक्षमता (efficiency) कम होती है और यह अधिक गर्मी उत्पन्न करता है, लेकिन स्थिर और क्लीन पावर की वजह से यह कई संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में आज भी उपयोगी है।
कंप्यूटर में SMPS का रोल
कंप्यूटर के लिए SMPS सबसे महत्वपूर्ण हार्डवेयर पार्ट्स में से एक है। यह कंप्यूटर को आवश्यक 3.3V, 5V और 12V DC सप्लाई करता है।
- 3.3V – मेमोरी, चिपसेट आदि के लिए।
- 5V – हार्ड डिस्क, USB पोर्ट आदि के लिए।
- 12V – प्रोसेसर और ग्राफिक्स कार्ड के लिए।
अगर कंप्यूटर में SMPS खराब हो जाए, तो सिस्टम स्टार्ट नहीं होगा या बार-बार रिस्टार्ट होगा।
SMPS चुनते समय ध्यान देने योग्य बातें
अगर आप कंप्यूटर या किसी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के लिए SMPS खरीद रहे हैं, तो इन बातों पर ध्यान दें:
- वाट क्षमता (Watt Capacity) – आपके सिस्टम की पावर जरूरत के हिसाब से चुनें।
- ब्रांड और क्वालिटी – अच्छे ब्रांड का SMPS लें ताकि लंबी लाइफ और सेफ्टी मिले।
- सर्टिफिकेशन – 80 Plus Certified SMPS ज्यादा एफिशिएंट होते हैं।
- कूलिंग सिस्टम – पंखा और हीट मैनेजमेंट बेहतर होना चाहिए।
- प्रोटेक्शन फीचर्स – ओवर-वोल्टेज, शॉर्ट-सर्किट और ओवर-टेम्प्रेचर से सुरक्षा हो।
SMPS के सामान्य प्रॉब्लम्स
SMPS खराब होने पर अक्सर ये समस्याएँ आती हैं:
- कंप्यूटर ऑन नहीं होता।
- बार-बार शटडाउन या रीस्टार्ट।
- अजीब आवाज या जलने की स्मेल।
- पावर लाइट फ्लैश होना।
ऐसे में या तो रिपेयर कराएं या नया SMPS लगाएं।
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FAQs
- प्रश्न: ब्रांडेड SMPS क्यों ज़रूरी है?
उत्तर: यह सुरक्षा, लंबे समय तक चलने और स्थिर वोल्टेज के लिए जरूरी होता है।
2. प्रश्न: SMPS बार-बार बंद क्यों हो जाता है?
उत्तर: Overload, Short Circuit या खराब Capacitor इसके कारण हो सकते हैं।
3. प्रश्न: SMPS को टेस्ट कैसे करते हैं?
उत्तर: पेपरक्लिप टेस्ट, मल्टीमीटर और PSU टेस्टर से SMPS की जांच की जाती है।
4. प्रश्न: AT और ATX SMPS में क्या अंतर है?
उत्तर: AT पुराना फॉर्मेट है जिसमें मैन्युअल स्विच ऑफ करना पड़ता है, जबकि ATX में सॉफ्टवेयर से कंट्रोल होता है।
5. प्रश्न: ATX SMPS कितने वोल्टेज आउटपुट देता है?
उत्तर: यह +3.3V, +5V, +12V, -12V, और +5V Standby वोल्टेज देता है।
6. प्रश्न: Modular और Non-Modular SMPS में क्या फर्क है?
उत्तर: Modular SMPS में केवल आवश्यक केबल्स ही जोड़ी जाती हैं जबकि Non-Modular में सभी केबल्स पहले से जुड़ी होती हैं।
7. प्रश्न: SFX SMPS क्या है?
उत्तर: यह एक छोटा SMPS फॉर्म फैक्टर है जो छोटे कंप्यूटर केस में फिट होता है।
8. प्रश्न: कितने प्रकार के SMPS होते हैं?
उत्तर: मुख्यतः चार प्रकार के – Buck, Boost, Buck-Boost, और Flyback Converter होते हैं।
9. प्रश्न: क्या SMPS में ट्रांसफॉर्मर होता है?
उत्तर: हाँ, लेकिन यह हाई फ्रीक्वेंसी ट्रांसफॉर्मर होता है जो पारंपरिक से छोटा और हल्का होता है।
निष्कर्ष
अब आपको साफ समझ आ गया होगा कि SMPS kya Hota Hai और यह हमारे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के लिए कितना जरूरी है। यह न केवल डिवाइस को सुरक्षित रखता है बल्कि बिजली की खपत को भी कम करता है।आज के समय में हर कंप्यूटर, टीवी, मोबाइल चार्जर और आधुनिक गैजेट में SMPS का उपयोग होता है। इसलिए अगर आप इलेक्ट्रॉनिक्स या कंप्यूटर हार्डवेयर को समझना चाहते हैं, तो SMPS की जानकारी सबसे जरूरी है।
तो दोस्तों, अब आप जानते हैं कि SMPS kya Hota Hai, इसका काम करने का तरीका, फायदे और उपयोग। अगर आपको यह जानकारी उपयोगी लगी, तो इसे शेयर जरूर करें।